बसोली निर्वाचन क्षेतर की अब यही पुकार, इस बार बिधायक हो स्थानिय पढा लिखा ईमांदार

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बसोली निर्वाचन क्षेतर की अब यही पुकार
इस बार बिधायक हो स्थानिय पढा लिखा ईमांदार!

दल बदलू, वेगाने बहुवलियों की अब कर दो छुटी !
काबिल सचे लालों को मांगे अब क्षेतर की माटी !

बहुत हो चुका लोगों की भावनाओं से खिलवाड का मजा
अगर किसी में दम हे तो वेह मोदी के नाम विना जीत के बता!
लोग तो मोदी के नाम पे हंस हंस कर जान भी लूटा देते हैं
नेता समझते हैं की लोग उन की योग्यता पर फिदा होते हैं !
आते ज़ाते लोग तो मंदिर के क्लश को शीश झकाते है
मंदिर की मुन्देर पर बैठे कौवे मन ही मन इतराते है
कहीं मुझ में वेह गुण तो नही जिस से लोग मुझे पूजते रहते हैं !

हर कोई घोडे के स्वार को ही सलाम करता हैं
वरना घोडा तो घास खाने और दुल्लती मारने के लिए जाने ज़ाते हैं.

जीवन में लिखी गई मेरी पेहली कविता .

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